दबा हुआ आज ************* कैद है मशीनों की खबरों में और सबेरे – सबेरे आता है बाहर नब्बे पैसों में केवल इधर बजता है रिकार्ड आज की ताज़ा खबर उधर …
पहाड़ों के बीच
प्रस्ताव ******** उंघती पहाड़ियों का उठकर सूरज की किरण से मुंह धोना और नदी से नहाकर लौटी सड़क का सुबह -सुबह अपने बीच से गुजरना कैसा लगता है ? आओ …
सारी रात ******** बड़े बड़े यंत्रों के स्वरों से कांप -कांप उठता है —मेरा हृदय सदैव यही लग रहा है कि मैं अब नहीं तो अब किसी न किसी टृक …
शकुन विचार ********** घर से निकलते ही दिखी सड़क पर बछड़े को दूध पिलाती गाय चार कदम आगे गुत्थम गुत्था होकर खेल रहे पिल्ले और सामने नीम पर बैठा कौओं …
पहाड़ पर ******** चित्त या पट्ट पड़ी इन चट्टानों को पहाड़ अपनी बताता है और अंका चट्टानें इसके बाप की हैं पहाड़ चित्त पट्ट का यह खेल चट्टानों के साथ …
ठीक पहचान के लिए ******************** पानी जब सदियों से खण्डा पड़ा हो तो —- उसे खौलाना जरुरी हो जाता है वह बादल ,बिजली ,आकाश से उतरकर खुद को ठीक से …
सतपुड़ा की आधी रात ******************* सन्नाटे को चीरते अचानक ढेंकने लगे सांभर पूंछ फटकार कर उठ बैठे रनभैंसे रुक – रुककर बादलों की घरघराहट फिर ऐसी दहाड़ कि टूट -टूटकर …
घर बाहर ******** पप्पू ने दरवाजों के पर्दों पर जो घुंघरु टांक दिये थे उन्हें हवा पांवों में बांधें घर -घर नाच रही है बाहर निगाहों की हद तक एक …
