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पहाड़ों के बीच

प्रस्ताव ******** उंघती पहाड़ियों का उठकर सूरज की किरण से मुंह धोना और नदी से नहाकर लौटी सड़क का सुबह -सुबह अपने बीच से गुजरना कैसा लगता है ? आओ …

शकुन विचार ********** घर से निकलते ही दिखी सड़क पर बछड़े को दूध पिलाती गाय चार कदम आगे गुत्थम गुत्था होकर खेल रहे पिल्ले और सामने नीम पर बैठा कौओं …

पहाड़ पर ******** चित्त या पट्ट पड़ी इन चट्टानों को पहाड़ अपनी बताता है और अंका चट्टानें इसके बाप की हैं पहाड़ चित्त पट्ट का यह खेल चट्टानों के साथ …

ठीक पहचान के लिए ******************** पानी जब सदियों से खण्डा पड़ा हो तो —- उसे खौलाना जरुरी हो जाता है वह बादल ,बिजली ,आकाश से उतरकर खुद को ठीक से …

सतपुड़ा की आधी रात ******************* सन्नाटे को चीरते अचानक ढेंकने लगे सांभर पूंछ फटकार कर उठ बैठे रनभैंसे रुक – रुककर बादलों की घरघराहट फिर ऐसी दहाड़ कि टूट -टूटकर …

घर बाहर ******** पप्पू ने दरवाजों के पर्दों पर जो घुंघरु टांक दिये थे उन्हें हवा पांवों में बांधें घर -घर नाच रही है बाहर निगाहों की हद तक एक …

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