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April 2024

परेड ग्राउण्ड पर –२ ***************** देश ! लेन बनाने के लिए एक दो तीन बोलेगा देश ! तीन तीन की लेन में तेरह तेरह खड़ा होगा देश ! तीन तेरह …

परेड ग्राउण्ड पर —१ ************* देश ! सावधान! कुछ भी हरकत नई ( नहीं ) करेगा कुछ भी सोचेगा समझेगा नई भाई चारे की नई दिखायेगा शान ! देश ! …

कब समझोगे विंध्याचल ? ********************** हिमालय के पक्ष में खेले गये अगस्त के उस नाटक को कब समझोगे विंध्याचल ? प्रणति मुद्रा में झुके कब सोचोगे उन ज्वारों के बारे …

वंश संक्रमण *********** मेरे परदादा ने जो वृक्ष रोपा था उसे मेरे दादा ने पाला पोसा पिताजी ने खायें उसके फल आज मेरे सामने वह सूखकर हो गया जर्जर जिसे …

ऊर्जा का संघर्ष —४ ***************** विषपायी के कण्ठ में तुम उन्मुक्त भाव से पहले ही बैठी थीं कितनी नीलवर्णी हो गई थी शिव की देह तभी से आकाश भी इसी …

ऊर्जा का संघर्ष —-३ ***************** वाक्यों शब्दों अर्थों के आपसी तनावों से मुक्त मैं स्वरों के संसार में समा गया हूं और ये भी मुझमें बैठकर ब्रह्म रन्ध्री हो गये …

ऊर्जा का संघर्ष –२ **************** ओ मेरी प्रार्थना ! तुम मुझे एक स्वर के रुप में मिली और मैंने तुम्हें आचमन की तरह अपने कण्ठ की बंशी में विह्वलता के …

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