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April 2025

प्रिया ***** ( ३ ) आजकल तुम सभी से हंसती – बतियाती हो सभी के सुख – दुख में होती हो शरीक प्यार की वो—- व्यक्तिगत लीक कितनी फूहड़ है …

प्रिया ***** ( २ ) यूं तो तुम नाज़नीन रही हो हमेशा से लेकिन खतरों के बीच इतनी जल्दी फन उठाए कर फुत्कारती नागिन बन जाना एक ऐसी मुद्रा है …

प्रस्तुत ******** ( २ ) धूप के माथे उठा कर धुएं की शिकने अब न जायेगी कहीं भी रोशनी बिकने अब न अन्ना बटेरों को खायेगा अब न बौनापन शिखर …

वह **** ( ९ ) वह सदा से अन्य पुरुष सर्वनाम ही रहा मध्यम ने पीसा उत्तम ने बरसाये कोड़े अब उसे —– भाव वाचक संज्ञा बनाया जा रहा प्रत्ययों …

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