बौराया प्यार दो ************** बासंती बेला में बौराया प्यार दो –। चाहे दो पल को ही मौसम का ज्वार दो ।। रोक लो मुझे तनिक अमुवा की छाँव में बुलबुल …
अंजुरी भर घाम
दो पल ही बोल लें **************** आओ !हम दो पल ही बोल लें! चुप्पी के बंधन को खोल लें !! समय तो है रेशम का धागा जो घिसता ही रहता …
बोलो अब ********** एक साँस ठण्डी है एक गरम बोलो अब क्या करें हम ? एक तरफ सूरज है चाँद एक ओर आसपास बेईमान बीच बडे़ चोर पहले पर रिश्वतिया …
घर -घर तुम बिखराओ फूल ********************** हर समय खिले-से रहते जो पथ पर वे बिखराते फूल पल पल में रोते रहते जो पथ पर वे बरसाते शूल नहीं कहीं कड़वाहट …
मुक्तक ****** जो सहज ही चल पडे़ वह रीत है । जो अधर पर मौन है वह प्रीत है ।। चपल बालक- सा उठे जो चौंककर — समझ लो बस …
