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November 2024

सूरज ****** (५ ) सूरज ,जो सुबह से शाम तक चक्कर लगाता था आसमान में अब अलावों चूल्हों में भी ढूंढें नहीं मिलता जाने किस समुद्री सतह या पहाड़ में …

सूरज ****** ( ३ ) अब तो सूरज मेरे जन्मदिन पर गरमागरम बधाइयां देना भी भूल गया बहुत समझदार हो गया मेरा बाल सखा ! ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी …

सूरज ***** ( १ ) सूरज आज भी मिलता तो है लेकिन औपचारिक मुस्कुराहट लिए बचपन के खिलौने जैसा काफी पीछे छूट गया सूरज परिवार का होकर भी मुझसे । …

वे ,मां ,बहन ,भाई ही होते हैं मेरे ************************** जब भी निहत्था मारा जाता कोई वह सगा भाई ही होता मानो दाहिना हाथ ही काट लिया हो किसी ने मेरा …

उसी आग की खोज में ******************* उसने कहा आग और में उसके पेट की तरफ देखने लगा उसका पेट – पेट की आग से झुलस कर ठण्डा पड़ा था जिसे …

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