Home आज की कवितासूरज – तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

सूरज – तुम पूरी पृथ्वी हो कविता

by Dr. Vinita Raghuvanshi
सूरज
*****
( ४ )
आज मैंने सूरज के साथ गाना चाहा
तो वह झनझनाता रहा देर तक
हाथ से सटके कांसे के
दूध भरे कटोरे की तरह
हमारे बीच
बचपन की दूध पीती कहानी
जमीन पर फ़ैल गई
और मैं समेटता रहा उसे
गीली मिट्टी के साथ ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —–” तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ” से उद्धृत )
आज की कविता में महाभारत कालीन संदर्भों के प्रसंग समेटे गये हैं । बचपन में जब असमानता का भाव बोध गहरा पैठ जाये तब। बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है ।गरीब और अमीर बचपन आपस में अहंकार की तुला पर टांग दिए जाते हैं ? सूरज अमीर बचपन का प्रमाण है । इसलिए वह साथ मिलकर गाने के प्रस्ताव पर झनझनाता है ।कांसे के कटोरे की उपमा भी बहुत सटीक दी गई है ।जिस तरह हाथ से बर्तन छूटकर जमीन पर गिरे तो बहुत देर तक और दूर तक घूमता हुआ आवाज करता है ।उसी तरह सूरज भी समानता की बात से आहत होकर झनझना रहा है ।यह सूरज का झनझनाना और दूध के कटोरे से जुड़ा प्रसंग जमीन पर फैल गया ।अहंकार हर हमेशा प्रपंच को ही जन्म देता है ।छोटे और बड़े के बीच मित्रता का भाव नहीं रहता । जहां अहंकार होता है वहां मित्रता भी नहीं रहती । एक के पास भावों की अनुभूति भरी नमी है तो दूसरे के पास अहंकार भरी गरमी ।सूरज अपने अहंकार की धूप को फैला रहा है और मित्र उसे समेट रहा है ।गीली मिट्टी पर पड़ती धूप के साथ ।सच है जहां अहंकार नहीं वहां नम्रता होती है । अहम् रहित सखा भाव रहता है । धूप के लिए भी कितनी सुन्दर कल्पना और उपमा दी गई है दूध की तरह फैली धूप ।गीली मिट्टी भी प्रतीक है भावनाओं की ।यदि मनुष्य में भावना नहीं होगी तो वह संबंधों की उष्मा को समझ नहीं पायेगा ।वह प्राणियों के साथ क्रूर और निर्दयी रहेगा ।वह जीवन के महत्व को भी स्वीकार नहीं पायेगा । मनुष्य का अहंकार ही है जो वह प्रकृति की उपेक्षा कर रहा है ।वह सूरज ,चांद ,तारों हवा ,पानी , मिट्टी के विकल्प खोज रहा है ।पर मनुष्य की यह खोज अधूरी ही रहेगी ।न कृत्रिम मनुष्य मनुष्य जैसा ही संवेदनशील ,करुणा मय , और विवेकवान ही बन सकेगा । मनुष्य की विशेषता ही है कि वह नम्र है। , संवेदनशील है ,दयावान है , करुणा से उसकी आत्मा परिपूर्ण है ।सूरज के पास ताप है और मनुष्य के पास आपा है ।संयम है ।मिट्टी का गीलापन है ।यही तो सूरज से मित्रता की वजह है ।सूरज और मनुष्य साथ साथ सृजन के गीत गा सकते हैं ।एक के पास गीली मिट्टी है और दूसरे के पास ऊर्जा भरी उष्मा है । सूरज की और मनुष्य की मित्रता बेमिसाल है । 🙏 विनीता रघुवंशी

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