एक दूसरे के लिए *************** उसने भरोसा किया मुझपर मैंने संदेह से देखा उसे उसका भरोसा ठीक निकला मेरा संदेह भी इसलिए कि हम एक दूसरे के लिए कुछ भी …
मंजती धुलती पतीली
मैं ही रहा ******** बिलोया गया लोक मथानी में मक्खन की तरह झाग झाग पकाया गया संस्कृति की आंच में घृत होने तक उगाया गया सभ्यता के खेत में तिल …
दुश्मन ******* सबसे ज्यादा विश्वसनीय होता शत्रु जिसकी कोई भी कुचाल नही होती अविश्वसनीय कभी वह ईर्ष्या और घृणा से इतना वाकिफ करा देता हमें कि नहीं रहती कोई भी …
ताकि बनी रहे ************ मैं हमेशा हमेशा छोटा कवि बना रहना चाहता ताकि बनी रहे बड़ी कविता रचने की लालसा सदैव और छोटी कविता रचते हुए बड़ा कवि होने के …
समझना होगा ************* समझना ही होगा हां का अर्थ ना ना करते नहीं मिलेगा कुच्छ भी ना नदी ना किनारे ना कछार ना कोई टापू भी । ( श्री प्रेमशंकर …
बढ़ते और घटते हुए **************** मैं एक से दो तीन करता सैंकड़ों तक जाता रहा तुम सैकड़ों से निन्यानबे अनठान्बे करते एक पर आकर रुकते रहे मैं बढ़ते बढ़ते विराट …
