बता देतीं पचास साल बाद गांव आया और लोगों से अपने घर का पता पूछ रहा गलियां होतीं तो भर भर धूल उछालती बता देतीं कूद -कूदकर । ( श्री …
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January 2024
पहल ***** खिलखिलाती धरती जब सकते में आती तो उसके चेहरे पर दूर -दूर तक रेत कंकर या भाटों –सई झांइयां उभर आती ओ पथरीली जमीन तेरे चेहरे पर सधे …
अपने ही आयुधों से ****************** अपने आप मूक होता गालियां बकने वाला एक दिन एक दिन लुप्त हो चुकी होती वाणी उसकी पश्चाताप से भरी आंखों की भाषा ही बचती …
संकल्प —२ *********** थकी हुई इन लोहित शिलाओं ने टोंक कर समय नहीं पूछा कभी जबकि रात- दिन अपनी -अपनी कलाइयों पर दमकती हुई घड़ियां बांधें दिशाओं के कंधों पर …
फौलाद की तरह ************** बाबा के बनाये घर को घर बनाये रखा पिता ने ता -उम्र कोशिश तो मैं भी करता रहा यही लेकिन बेटे ने मलवा तक बेंच दिया …
पहाड़ से बातचीत *************** पहाड़ ! तुझे पर क्या टूट पड़ा है कि तेरी चट्टानें पहले से ज्यादा भयावह लगने लगी हैं इनके इर्द गिर्द और ऊपर संतरियों —– से …
डूबकर डूबा नहीं हरसूद ******************* ढोर -डांगर गाड़ी -बैल छेरा -छेरी कुत्ता -कुत्ती पिल्लों सहित बल्कि चिड़ियों चेनुओं के साथ बढ़ा जा रहा काफिला हमारा जिनके हरेक जन की कम्मर …
तब तक ******* जब भी चलता हूं लगता है मेरे कदम किसी क्रान्ति उत्सव में शामिल होने के लिए बढ़ रहे हैं किन्तु तब तक आॅफिस आ जाता है वहां …
