तनिक ****** सुनो ! जरा सुई धागा लेती आना क्या हुआ ? देखो तो ! कई जगह से उघड़ गया हूं तनिक सिल दो ! तुम सुई धागा भी तो …
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January 2024
जब भी याद करता नर्मदा को ************************ मैंने तो मकर संक्रांति की शीतलहर में ठंड से कांपती नर्मदा को कुनकुनी रेत के अलावा पर बदन सेंकते देखा है घाट -घाट …
वजह ***** बदलते हुए लोगों के बीच तू आज तक नहीं बदली तेरी आत्मा ने कोई चोला नहीं बदला वह संधों के बीच फंसकर रह गई क्या ? चलना सीखने …
गरज ****** समुद्र गरजता है बादल भी गरज पड़ने पर अपने -अपने ढंग से गरजता हैं सभी यह देखें बिना कि जमीन पर हैं या आसमान पर । ( श्री …
सिरे तक ******* प्यार उस खरगोश की तरह है जो एक सिरे से बिल बनाता दूसरे सिरे तक निकल जाता जहां उसी का इंतजार करती घृणा हर बार खड़ी मिलती …
पिता ***** चाहे जितना सर्द गर्म हो मौसम पिता भोर के पहले उठ आते नहा धोकर रोज रोज नहलाते घाटी से उगते सूरज को — चमचमाते कलश से मुझे पिता …
हँसी के आँसू *********** हँसी के आँसू देखे हैं ? वे रुदन के आँसुओं जैसे नहीं होते ना उतने गरम ना उतने तरल ना ही समाया रहता सागर भर नमक …
प्रेमशंकर रघुवंशी जी के जन्मदिवस पर एक विशेष कविता पुण्य स्मरण के साथ समर्पित उम्र के वृक्ष पर ************* भरपूर जीकर उम्र के वृक्ष पर निशान छोड़ झरने ही वाला …
