अक्सर यह कहता है अनूप ********************** अक्सर यह कहता है अनूप कि बिना कीमत कुछ भी नहीं देता ग्राहकों को वह और मैं हूं कि देता रहता मुफ्त बिना कीमत …
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December 2023
बेखबरी ******* एक दूसरी से सटी हुई चट्टानें इतनी अपरिचिता क्यों है ? कब जानेंगी ये अपना इतिहास और कब बतायेंगी एक -दूसरे को अपनी वर्तमान कथा ? चुप्पी जो …
पहाड़ ***** दावानल के वक्त एक लम्बी लकीर की तरह सुलगने लगता है पहाड़ मेघों की झरी में झरनों , नदियों -प्रपातों के संगीत में डूब जाता है पहाड़ ! …
मेरा बेटा ******** मेरा बेटा मन ही मन मेरी कीमत आंक रहा है मुझमें उसे मुद्राओं की फसलें दिखाई देती है जबकि तथ्य यह है कि मैं घर,घूरे ,सड़क या …
खारिज ****** उसे डर है कि मारा जाऊंगा और वह निश्चिन्त है कि मार ही डालेगा और दोनों के बीच फंसीं जनता यह सोच ही नहीं पा रही —- कि …
कटी हुई जमीन ************ तुमने काफी कुछ दूर से ताकती हुई जमीन को दे दिए झरने — नदियां दूर दूर तक फैले मैदानों को पेड़ -पौधे -घास – लताएं असंख्य …
हांका ***** आसमान से पहाड़ों —मैदानों तक सांय —– सांय न तो धूप में कोई हरकत है न पेड़ -पौधों पत्तों में थिरकन हरचरन ! ओ हरचरन !! क्या सो …
आधार ****** जो राजनीति से देश चलाये मैं साथ हूं उनके वहां तो कतई नहीं जो नागरिकों को अपाहिज कर बैसाखियां पकड़ाते हैं और गाते हैं —— शस्य श्यामला के …
