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November 2023

पत्थरों के बारे में सोचते हुए ************************ पत्थरों की आंखें इतनी नम क्यों है ? क्यों फूटते हैं सन्नाटों के गीत इनकी आहों से ? दोपहरें इनके शरीर को काला …

पहाड़ो के बीच ************ पहाड़ों की चोटियों तक देह पर अजगर कसे मत दौड़ों किसी गोल पत्थर की तरह लुड़कते चले जाओगे पहाड़ी यात्रा की तैयारी के पहले मोमबत्ती की …

लोकतंत्र के आकाश पर ******************* यह सच है कि लोकतंत्र में लोक को चाहे जितना सताओ नहीं बना सकते गुलाम उसे ना ही कर सकते तानाशाहों की तरह वहां कुछ …

आदमी होते ही ************ हमसे ज्यादा कल्याण कारी हैं टेबल कार्बन का गरलपान करते और बदले में लुटाते आकसीजन का अमृत हमसे ज्यादा ततववती है लताए़ जो फलती फूलती समर्पित …

प्रहरी ***** तुम यदि देश की सत्ता हो तो प्रहरी हूं मैं तुम्हारे वास्ते भी — और अवाम के लिए भी क्योंकि मेरे अंदर का सूरज कभी डूबता नहीं और …

निर्भिकता ********* वह निर्भिकता के साथ भय की खोज में निकला तो लोगों ने रोका और गले में ताबीज बांधकर टोने -टोटके पकड़ा दिये हाथों में उसके अब निर्भिकता किसी …

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