सम्मोहन उसका ************* उसके मुंह से भूख शब्द निकलते ही उसने उसे हिप्नोटाइज करके अचेत कर दिया फिर बोला — ‘जमूरे इधर आओ ‘ बोलो — ‘क्या चाहिए ‘ रोटी …
आकार लेती यात्राएं
किसी एक दिन ************** शेर ! मेरे पास आ तुझे अपने पास पड़ी बकरे की पुरानी खाल उड़ा दूं इसे ओढ़ कर तू घास – पात पर मुंह तो मार …
आकार लेती यात्राएं ***************** ( ५ ) अपने पंजों और एड़ियों पर हथेलियां फेरते हुए उसे लगा कि —- जाने कब से कांटों का एक जंगल ही समाया है उनमें …
आकार लेती यात्राएं ***************** ( ४ ) जूते वाले लोग अपनी तिकड़मों में जाने कहां घूमघाम कर अलस्सुबह तस्में खोलते तो इनकी गैलरियों से झरने लगती दुर्गंध जिसे सूंघता हुआ …
आकार लेती यात्राएं ****************** ( ३/२ ) जादू टोनों के कल्पना लोकों से हो कर धर्म – दर्शन और मिथकों के स्वप्न संसारों के बीच से — दौड़ता — भागता …
आकार लेती यात्राएं **************** ( ३ / १ ) धूप और धरती की आंच से भट्टे पड़े सख्त पांव सफेद झक्क यात्रा के लिए जाने कब से चल रहे हैं …
आकार लेती यात्राएं ***************** ( २ ) खटिया पर लेटी दादी मां शाम होते ही आंगन में अपने नाती पोतों से हाथ – पांव दबवाती सुना रही कहानी – – …
आकार लेती यात्राएं **************** ( १ ) करीने से सजते जाते जूतों की कतारों से सुरक्षित चरण कमलों में और चर्र – चर्र मुरादें छोड़ते उनके नंगे पांवों में कितना …
