ऐसे में ****** जब भी लिखना चाहता कविता मुझे अपने जूते की कील आंंसने लगती जिसने तलुए को छलनी छलनी कर दिया है मेरे पीछे। बढ़े आ रहे सिपाही फुर्ती …
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May 2025
चलो अब ******** ( ४ ) क्या कहा — तुम्हें सामान लेकर चलना है ? क्या इस चुटकी भर आग से काम नहीं चलेगा ? इस धूप ,इस नशे इस …
चलो अब ********* ( ३ ) हम जिस जगह पर आकर खड़े हो गये हैं वह — हमारी निगाहों तक ठोस है आसमान की बातें सिर माथे रखना फिजूल है …
चलो अब ******** ( २ ) माथे पर चन्दन की टिपकी रखे ये बूढ़ा आसमान बड़ी शराफत से चन्द्र किरणों के फोकस से हमें देख रहा है चलो, अब हम …
चलो अब ******** तुम्हारी गोदी में सिर धरे सोता हूं उस वक्त मैं एक नन्हा मेमना होता हूं उस वक्त— मेरा यह अपनापन और उसके आसपास का सब कुछ खो …
आदेश सो रहे हैं ************** शोर मत करो —यहां आदेश सो रहे हैं जाग गये तो गज़ब ढा देंगे गर्दनें झुकायें चलो ताकि सड़क को भी लगे कि उस पर …
सतपुड़ा की शाम ************** बड़ी – बड़ी घाटियों पर अचार चुनती हुई बुढ़िया – सी किरन ओझल हो गई और अब रह गया महुओं सा भरा आकाश बीच – बीच …
बच्चे ***** बच्चे पेड़ नहीं काटते पत्तियों से निकाल कर रस बनाते हैं दीवारों पर कल के नक्शे बच्चे चिड़िया नहीं मारते उनके पंखों को बीन बीनकर सजाते हैं मेज …
