पिता की डायरी ************** माँ ने जतन से रखी है पिता की डायरी चाहे जब एकान्त में फेरती उस पर हाथ ठीक उसी तरह जैसे कि —- आखरी वक्त तक …
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March 2021
सूरज ****** मैंने आज सूरज को बदलिययों से छेड़छाड़ करते देखा मैंने आज सूरज को इन्द्रधनुष रचते देखा मैंने आज फिर से जाना कि सूरज के पास धूप ही नहीं …
गूंगे पन की कसमसाहट ********************* अग्नि ने कोई शब्द नही रचा न जल ने न वायु ने और पुष्प कभी बोलते नही आकाश ने कोई भाषा नहीं रची न नक्षत्रों …
शान है पानी *********** बिलाशक —- प्यासे का प्राण है पानी चमक है धरती की चेहरों का नूर भी बिलाशक —- थाली की दमक है पानी गमक है रोटी की …
ऐसे में कैसे -2 ********** दिन भर भटक कर लौटी चिडियाँ जब शाम को पनघट के उस पीपल पर फुदक फुदक कर गाती है तो ऐसे में उन्हें चुप करने …
ऐसे में कैसे ********** जुबानों पर कुण्डियाँ लगी है दस्तकें तक डूब जाती इस महाचुप्पी में ऐसे में कोई भी कैसे गा सकता कोई छन्द क्योंकि जब जुबानें बन्द हो …
हँसने के लिए ************ हँसने के लिए ढेर सारी चीजें नही चाहिए कुछ बेफिक्री ,कुछ उमंग कुछ आनंद और छाती भर आक्सीजन काफी है आक्सीजन ः जो हरे भरे पेडों …
बे मौसम बरसात *************** नदी की धार के नीचे चमकती बालू जितनी सुहानी लगती उतनी ही बुरी लगती घरों में घुसती रेत चूल्हे या अलाव की आग जितनी सुहानी लगती …
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