कवि की खोज में भटकती कविता ********************** आश्वस्त होना चाहती कि मुझे — कुछ दूर ही सही जिंदगी के पास तो ले चलोगे कवि आश्वस्त होना चाहती कि मुझे — …
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April 2021
हरे पेड़ यूँ लगते ************* हरे पेड़ यूँ लगते मानो पूजा गॄह हों हरे भरे सुबह शाम जिनकी शीतल छाया सजदे की मुद्रा में नत हों क्षितिजों को छू लेती …
रहने लायक है दुनिया अभी इतनी खराब नहीं हुई दुनिया कि रहा ही नहीं जाए इस पर ऐसा कभी होगा भी नहीं अभी तो — झाडुएँ बनाने और बुहारने वालों …
प्रणय का अनहद *************** लिख देना चाहता एक कविता अपनी कलम से बदन पर तुम्हारे उतार देना चाहता मन में सभी इन्द्रधनुष अपने और भर देना चाहता प्रणय का अनहद …
भूल जाने की याद में ******************* जब से भूलने का कहा तुम्हें भूलने की कोशिश में लगा रहता सपनों से भी कहता कि वे भूल जाने को आया करें भूल …
जिनसे भी करता प्यार ******************* जिनसे भी करता प्यार याद नही रहती जन्मतिथि याद ही नहीं रहती रुचि -अरुचि अच्छाई -बुराई उनकी जिनसे भी करता प्यार नहीं खिंचा पाता फोटुएँ …
गाँव मेरा सिरहना है ***************** छन्नू दादा बताते रहे गाँव के हाल देर तक और लौटते हुए छोड़ गये फर्श पर पगथलियों के निशान जहाँ उभरने लगे खेत भरने लगी …
अरदास करते वक्त **************** देवालय में घुस आया दैत्य पूजा के शब्दोच्चार में निखर रहा जिस का रुप जय -जय कार के बीच घूरता युवतियों को अपने साम्राज्य की चीजों …
