जिनसे ****** जिनसे तंग आकर आत्महत्या तक पहुंची औरत वे भी अपनी पूरी सुरक्षा के बाद बचाने दौड़े उसे और जब भेजी गई लाश पोस्टमार्टम को तो लपककर चीलघर की …
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July 2025
मित्रवर ******* बहुत दिन हो गये न नदियों को हवा खाते देखा न पहाड़ों को पानी पीते न जंगलों को आग खुरचते न बीजों को माटी मिलते बहुत दिन हो …
जब ***** खिल गये धरती आकाश धूप के पैदा होते ही बजने लगे नगाड़े घटाओं के पानी के जनम पर कण कण हो गये गतिवान हवा के अवतरण पर धूप …
सम्मोहन उसका ************* उसके मुंह से भूख शब्द निकलते ही उसने उसे हिप्नोटाइज करके अचेत कर दिया फिर बोला — ‘जमूरे इधर आओ ‘ बोलो — ‘क्या चाहिए ‘ रोटी …
किसी एक दिन ************** शेर ! मेरे पास आ तुझे अपने पास पड़ी बकरे की पुरानी खाल उड़ा दूं इसे ओढ़ कर तू घास – पात पर मुंह तो मार …
आकार लेती यात्राएं ***************** ( ५ ) अपने पंजों और एड़ियों पर हथेलियां फेरते हुए उसे लगा कि —- जाने कब से कांटों का एक जंगल ही समाया है उनमें …
आकार लेती यात्राएं ***************** ( ४ ) जूते वाले लोग अपनी तिकड़मों में जाने कहां घूमघाम कर अलस्सुबह तस्में खोलते तो इनकी गैलरियों से झरने लगती दुर्गंध जिसे सूंघता हुआ …
आकार लेती यात्राएं ****************** ( ३/२ ) जादू टोनों के कल्पना लोकों से हो कर धर्म – दर्शन और मिथकों के स्वप्न संसारों के बीच से — दौड़ता — भागता …
