अनंत को लेकर *************** ( ३ ) तुम, जब भी मेरे पास आते सीमाएं तुमसे जलती हैं लेकिन तुमने कभी यह भी देखा — कि वे मोम की तरह कितने …
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July 2025
अनंत को लेकर ************** ( २ ) अपने चमचमाते सूरज और बन्द तहखाने एक साथ फैला दिये तुम्हारे सामने लेकिन तुम — दांतों से नाखून कुतरते दूर उस पहाड़ी पर …
अनंत को लेकर ************* ( १ ) तुम्हारे पास वह सब है जिसका तुम्हें अन्दाज तो होना ही चाहिए एक बहुत बहुत गहरा जलाशय तुम्हारी आंखों में समाना चाहता उसे …
तलघर में ********* ( २ ) महात्मा गांधी की मूर्ति के ठीक सामने पहुंचते हम किस्सा खत्म करते हुए वह मुझे कुछ दूर रख कर अहिंसा के देवता के कल्याणकारी …
तलघर में ******** (१ ) मुझे अक्सर –उसके घर के सामने से ही आना – जाना पड़ता है हर बार वह रोम – रोम से मुस्कुराते हुए — करता दण्डवत …
जूता : अलग अलग सन्दर्भ ************************ ( ४ ) सूरज को गलबहियां डाले उसके खीसें से चबेना निकाल दड़दडाते खिलखिलाते चहलकदमियां करते आदमी के बारे में —- तुमने कभी सोचा …
जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( ३ ) प्रकृति के पास नहीं है पादुकाएं हरिण तोते मोर मैं ना कौन से जूते पहनते ? बाज़ का सर्र – …
जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( २ ) जूतों के अलग – अलग नम्बर हैं नम्बर एक का जूता एकदम धवल और आकर्षक लगता खादी के मोजे पहनें …
