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July 2025

अनंत को लेकर ************** ( २ ) अपने चमचमाते सूरज और बन्द तहखाने एक साथ फैला दिये तुम्हारे सामने लेकिन तुम — दांतों से नाखून कुतरते दूर उस पहाड़ी पर …

अनंत को लेकर ************* ( १ ) तुम्हारे पास वह सब है जिसका तुम्हें अन्दाज तो होना ही चाहिए एक बहुत बहुत गहरा जलाशय तुम्हारी आंखों में समाना चाहता उसे …

तलघर में ********* ( २ ) महात्मा गांधी की मूर्ति के ठीक सामने पहुंचते हम किस्सा खत्म करते हुए वह मुझे कुछ दूर रख कर अहिंसा के देवता के कल्याणकारी …

जूता : अलग अलग सन्दर्भ ************************ ( ४ ) सूरज को गलबहियां डाले उसके खीसें से चबेना निकाल दड़दडाते खिलखिलाते चहलकदमियां करते आदमी के बारे में —- तुमने कभी सोचा …

जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( ३ ) प्रकृति के पास नहीं है पादुकाएं हरिण तोते मोर मैं ना कौन से जूते पहनते ? बाज़ का सर्र – …

जूता : अलग – अलग संदर्भ ************************* ( २ ) जूतों के अलग – अलग नम्बर हैं नम्बर एक का जूता एकदम धवल और आकर्षक लगता खादी के मोजे पहनें …

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