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September 2024

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( ३ ) कब तक — काटता रहूं दिन ? कब तक — लिखता रहूं कविताएं ? अब हम —- मिले तो बिछुड़े नहीं ! …

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( ३ ) कब तक — काटता रहूं दिन ? कब तक — लिखता रहूं कविताएं ? अब हम —- मिले तो बिछुड़े नहीं ! …

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( २ ) एक आईना हूं कि जिसमें देखती हो खुद को और सोचती हो कि वह सिर्फ तुम्हारा है !! ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी …

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( २ ) एक आईना हूं कि जिसमें देखती हो खुद को और सोचती हो कि वह सिर्फ तुम्हारा है !! ( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी …

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( १ ) उग रहा तुम्हारे भीतर आहिस्ता महसूस करो अपने उमड़ते खिलते जिस्म में कि वहां —- बह रही एक नदी और महक रहा …

रोशनी का अखण्ड सुहाग ********************* ( १ ) उग रहा तुम्हारे भीतर आहिस्ता महसूस करो अपने उमड़ते खिलते जिस्म में कि वहां —- बह रही एक नदी और महक रहा …

चौखट – दर – चौखट ***************** ऐसा क्या है कि हर बार दरवाजे तक आ कर लौट जाती कविता और गलियारे का घना पीपल भी ( दो घड़ी अपनी छांव …

चौखट – दर – चौखट ***************** ऐसा क्या है कि हर बार दरवाजे तक आ कर लौट जाती कविता और गलियारे का घना पीपल भी ( दो घड़ी अपनी छांव …

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