आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ****************************** ( ४ ) गोद में लिये खिला रही होती तुझे तो दुनिया भर की अलाय – बलाय झपकी मारते ही भागती नजर …
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September 2024
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************************* ( ३ ) तब लगता कि मां के पास जाने कितने — उजड़े बसे चेहरे हैं यादों के और जाने कितनी मुद्रा …
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************************* ( ३ ) तब लगता कि मां के पास जाने कितने — उजड़े बसे चेहरे हैं यादों के और जाने कितनी मुद्रा …
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस ************************ ( २ ) लेकिन इससे क्या होता है तू तो पैदा भर हुआ था उस दिन ठीक उसी तरह जिस तरह हुए थे तेरे …
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस ************************ ( २ ) लेकिन इससे क्या होता है तू तो पैदा भर हुआ था उस दिन ठीक उसी तरह जिस तरह हुए थे तेरे …
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************** ********** ( १ ) दुखते पांवों पर हथेलियां फेरती मां बीती रात के सपने सुनाने मेरे पास बैठी है कहती हैं —- …
आठ जनवरी उन्नीस सौ छत्तीस से ही ******************** ********** ( १ ) दुखते पांवों पर हथेलियां फेरती मां बीती रात के सपने सुनाने मेरे पास बैठी है कहती हैं —- …
भाषा ही होती हमारे बीच ********************* ( ९ ) लंबी कविता का अन्तिम अंश *********************** स्वयं में उलझा होता अकर्मक शब्द और सकर्मक जीवन को सार्थक करता रहस्यों के करीब …
