इतना तो हम कर ही सकते हैं ************************** इतना तो हम कर ही सकते हैं कि आम को आम और बबूल को बबूल ही कहें इतना तो हम कर ही …
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March 2025
चीजें ****** उनसे पूछा जाये जो हर हाल में गवाह है मौत के पूछा जाए उस बिस्तर से जो बिछा रहा तक – सा वे कुर्सी – मैजें वे अलमारियां …
सन्तू ,मेरे दोस्त ************* ( ४ ) एक बेचैनी एक तनाव के बीज लेकर जिस संवेदनशील जमीन पर खड़े हो वहीं से शुरु करनी होगी बखरनी – बोवनी ताकि उगती …
सन्तू ,मेरे दोस्त ************* ( ३ ) वहां भी हमेशा बरसते होंगे हण्टर नंगी पीठों पर वहां भी पण्डों – सण्डों या सुअर- गाय को लेकर होते होंगे फसाद वहां …
सन्तू ,मेरे दोस्त ************* ( २ ) ( जन चरित्री होने के लिए मुक्त होना ही पड़ता है अपने अन्दर के ब्रह्मराक्षसो से ) मैं गहराई से जानता हूं तुम्हारी …
सन्तू ,मेरे दोस्त ! ************* ( १ ) ( लंबी कविता का पहला अंश ) सन्तू ,मेरे दोस्त मैं जानता हूं तुम्हारी छटपटाहट अच्छे खासे अफसर होकर भी तुम सोचते …
कविता नारक्या दाजी के साथ ************************* ( ३ ) लंबी कविता का अंतिम अंश ************************** ऋतुओं को राग वि – राग बांटते नारक्या दाजी जब भी अलापते ऐसे – ऐसे …
कविता नारक्या दाऊजी के साथ ************************** ( २ ) एक – एक दरख़्त एक – एक पौधा तिनका मानता परिजन उन्हें चिलचिलाती दुपहरी में रींझ – रींझ पोंछती लताएं दाऊजी …
