जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ******************************* ( ३ ) ठीक की सूद पर उमड़ पड़ते गांव के गांव फिर –‘परदेसी पिया — प्रीत न लगइयो घर दूर है ‘ की …
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March 2025
जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ****************************** ( २ ) दूध पीती उम्र से ही लोगों की कानाफूंसी और शरारती हरकतें देखी तो एक – एक छेड़छाड़ बचकाना ढंग से झेलने …
जमना बेड़नी और बिहारी ढोलकिया ***************************** ( १ ) बीज तो बीज होता जो जमीन पाते ही किलक उठता हरियाली के साथ कोड़ी पिता और पागल मां की कोख से …
गोबरया ******** ( ५ ) लंबी कविता का अन्तिम अंश ************************* बैल की उम्र जैसे दांत देख कर जानी जाती वैसे ही गोबरया दांत से आयु और बित्तों से समय …
गोबरया ******** ( ४ ) लंबी कविता का अंश ****************** आग जला उसनती उसकी पत्नी आटा लोइयों पर पड़तीं खमीर की चित्तियां उतावली – सी चूल्हे पर तवा चढ़ा सेंकती …
गोबरया ******** ( ३ ) तब हिमालय से भी ऊंचा लगता वह मानसून तक बोने लगते उसके मुकाबले यह सब महसूस ता गोबरया अपने सयानों को चिल्ला – चिल्ला कर …
नोट :– गोबरया के अंश -१ में एक संशोधन करिए —“बयानो” जहां है वहां “सयानों ” पढ़िए ।क्षमा सहित गोबरया ******* ( २ ) जोर – जोर से कश खींचता …
गोबरया ********* ( १ ) लंबी कविता का पहला अंश ************************ कैसी मजबूरी रही होगी उस वक्त गोबरया के पूर्वजों की जब किया होगा उन्होंने दावन में जुते बैलों के …
