मेघ विवेकानंद हैं *************** तिथि ,दिन या मूहूर्त की घोषणा किये बगैर बिना किसी यक्ष संदेश के इधर आओ अपनी कौंधों के साथ डायनामाइट की दन्नाहट लिए ताकि शयनागारों में …
Monthly Archives
March 2024
हर शब्द ****** हर शब्द एक मुस्लिम सफर है स्याह और ठोस चट्टानों से ध्रुवान्तों की बर्फीली चोटियों तक ! हर शब्द एक लक्ष्य भेदी बाण है कमान से छूटा …
जिन्दगी ******** जिन्दगी जैसी कोई चीज मेरे पास आई बोली –मुझे छुओ अपना क्या अपना तो छूने का लम्बा इतिहास है पत्थर को छुएं तो लहरीली नदिया हो जाये उससे …
दबा हुआ आज ************* कैद है मशीनों की खबरों में और सबेरे – सबेरे आता है बाहर नब्बे पैसों में केवल इधर बजता है रिकार्ड आज की ताज़ा खबर उधर …
प्रस्ताव ******** उंघती पहाड़ियों का उठकर सूरज की किरण से मुंह धोना और नदी से नहाकर लौटी सड़क का सुबह -सुबह अपने बीच से गुजरना कैसा लगता है ? आओ …
सारी रात ******** बड़े बड़े यंत्रों के स्वरों से कांप -कांप उठता है —मेरा हृदय सदैव यही लग रहा है कि मैं अब नहीं तो अब किसी न किसी टृक …
शकुन विचार ********** घर से निकलते ही दिखी सड़क पर बछड़े को दूध पिलाती गाय चार कदम आगे गुत्थम गुत्था होकर खेल रहे पिल्ले और सामने नीम पर बैठा कौओं …
पहाड़ पर ******** चित्त या पट्ट पड़ी इन चट्टानों को पहाड़ अपनी बताता है और अंका चट्टानें इसके बाप की हैं पहाड़ चित्त पट्ट का यह खेल चट्टानों के साथ …
- 1
- 2
