Home आज की कवितादबा हुआ आज-दबा हुआ आज

दबा हुआ आज-दबा हुआ आज

by Dr. Vinita Raghuvanshi
दबा हुआ आज
*************
कैद है
मशीनों की खबरों में और
सबेरे – सबेरे आता है बाहर
नब्बे पैसों में केवल
इधर बजता है रिकार्ड
आज की ताज़ा खबर
उधर हम पागल हो उठते हैं
अपने ही आप में दुनिया का चेहरा देखने को
महत्वपूर्ण हैं हम
पूरा अखबार हमें पढ़ना है सिर्फ इसलिए !
बाढ़ आई —बह गये लोग
बम गिरे — ढह गये लोग
दुर्घटना , व्याभिचार, बलात्कार
हत्या ,लूट -पुलिस का पूरा रोजनामचा
कल ? कल जो हो
खबरों के पहाड़ के नीचे दबा हुआ आज
कब दम तोड़ दे
कहां नहीं जा सकता !
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह —-“ पहाड़ों के बीच ” से उद्धृत)
आज की कविता में आदमी के जीवन में खबरों और अखबारों को लेकर जो आकर्षण होता है ।वह किस तरह अपने आप में बासी और ऊबाऊ होता है ।इसकी परख भी कविता में की गई है ।हम अपने रोजमर्रा के जीवन में जो कुछ घटित होता है ।जो कुछ गुजरता है ।उस वर्तमान के प्रति उतना उत्सुक नहीं होते । लेकिन हम उस सब को जानने के लिए बहुत ज्यादा जागरुक होते हैं जो हमारे आस-पास ,हमसे बहुत दूर देश और दुनिया के किसी कोने में घटित हो रहा होता है जो हमारे जीवन को जरा भी प्रभावित नहीं करता लेकिन हम उसे जानने ,उस पर विचार करने और उस पर तर्क – वितर्क करने ,चिन्तित होने ,पीड़ा और कष्ट का अनुमान – अनुभव करने में पीछे छूटना नहीं चाहते । इसलिए अखबार को पढ़ना हमारी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।अखबार की प्रति हाथ में आते ही हम देश और दुनिया की उन तमाम खबरों को जानना – समझना चाहते हैं और उन पर विमर्श भी साझा करते हैं जैसे दुनिया और देश के हालात में नागरिकों के सुचिन्तन की सीधी भागीदारी हो ,जन प्रतिनिधि और सत्ता वह सब जो जनहित में है वह नागरिकों की सहमति और मतानुसार ही करती है ? यह सब समझना फिजूल ही है ? सत्ता के सच जनता से बिल्कुल अलग होते हैं और खबर भी सत्ता के मुताबिक ही छपती और छापी जाती है ।फिर भी जनता अखबार का समाचार -पत्र का इन्तजार करती रहती है ? अखबार में कोई भी कला संबंधी और साहित्य संबंधी , सामाजिक बोध से संबंधित प्रेरक खबर नहीं छापी जाती ।न ही आज के अखबार चेतना के सृजन का माध्यम ही हैं ।इन अखबारों में खबरों का बासीपन और पुलिस थानों के जरिए प्राप्त घटनाओं को ही अख़बार में छाप दिया जाता है ।अखबार में सभी समाचार सरकारी महकमों के झूठे विकास की भीगों से भरी होती है ।अखबार जन -प्रेरणा मानवीय सरोकार और जनता की वास्तविकता से ,उसके लोक विश्वास और कलाभिरुचि को अपने संस्करणों में स्थान नहीं देते ना ही खबरों में लोक मानस की चिनतन ,चिन्ता , कठिनाई ,पर ही नजर होती है ।वह केवल जन-प्रतिनिधि,सत्ता के नुमाइंदों,सरकारी अफसरों के पीछे दुम दबाये चलती रहती है ।पूरा समाज ताजा खबर के नाम पर बासी घटनाओं ,अतीत को दोहराता और पढ़ता रहता है ।अपने वर्तमान से बेखबर । प्रेरणादायक तो हमारा आज होता है लेकिन जब से छापेखानों की ईजाद हुई और अखबार छापे जाने की तरकीबें खोजी गई तब से हम आज को भूल कर गुजरे कल में जीने के अभ्यस्त हो गये ।हमारे वर्तमान से ज्यादा हमारा अतीत हम पर ज्यादा हावी होता है ।आज मीडिया की उछाली गयी खबर हमारे वर्तमान को ज्यादा भ्रमित कर रही है ।खबर मनुष्य की चित्त वृत्तियों को बहुत ही अस्थिर बना देती है ।ख़बरें मनुष्य को इतना ज्यादा असर डालती है कि हर झूठी खबर भी मनुष्य के आत्म विश्वास और भरोसे को हिला देती है ।वह हर अखबारी खबर को सच मानकर सत्य ही मान लेता है ।अखबार में छपा है तो झूठ कैसे हो सकता है ? क्या अखबार झूठी खबर छापेगा ? खबर यदि अखबार की है तो वह विश्वसनीय ही होगी और ताजा तीन ही होगी यह भी जनता को परखना चाहिए ? हर खबर जो अखबार के पन्नों में छपी है वह सत्य नहीं होती ।कभी कभी जन मानस को उकसाने के लिए भी खबरें बनाकर छाप दी जाती है ।अखबार और समाचार की भूमिका मनुष्य के सामाजिक जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है ।जनता के बहुत से राजनीतिक, सामाजिक,आर्थिक, आध्यात्मिक,धार्मिक भावनाओं और मतों का ध्रुवीकरण समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर भी हो जाता है ।अखबार आज की आधुनिक जीवन शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है ।किन्तु अखबार कल की खबरों का पहाड़ होता है जिसे पढ़ते पढ़ते हमारा आज ,हमारा वर्तमान उसमें दबा जाता है ।आज पर विचार करना रह जाता है । इसलिए मनुष्य को यदि अतीत से बाहर आना है तो उसे वर्तमान पर विचार के तत्व खोजने होंगे ।अतीत शोधन के नाम पर हम आज को मरने नहीं दे सकते ।हमारा वर्तमान हर पल ताजगी और स्फूर्ति से भरा है । अखबार से ज्यादा ताजगी हमारी वैचारिक वर्तमान में समाई होती है ।अखबार तो महत्वपूर्ण है ही लेकिन आज उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है ।अखबार की बासी खबर से ज्यादा आदमी का आज का जीवन ज्यादा प्रेरणादायक होगा ।दिशा तो वर्तमान से ही तय करना होगी ।अखबार का बासीपन केवल समाज की दशा बताने का काम करता है ।तय तो वर्तमान की दशा के बदलने की दिशा करनी है ।आदमी का वर्तमान ही सबसे बड़ी खबर है यही दशा भी है और दिशा भी । 🙏विनीता रघुवंशी

You may also like

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More