नाला — ९ ********** अभी अभी नाले में हिरनियां खुरों से आंखें खुजलाती रोयां रोयां चाटती रही देह और भेड़ियों की आहट पाते ही छलांगती हुई समा गई पहाड़ में …
पहाड़ों के बीच
नाला — ८ ********** लोकगीतों की तरह प्रकट होती पगडण्डिया कि जिन्हें रचती हैं अनाम पगथलियां लोक धुनों की तरह अवतरित होते झरने कि जिन्हें रचती हैं घाटियों की उमंगे …
नाला — ७ *********** नाले में जो बह रहा वह पहाड़ ही तो है करुणा से पिघलता कभी का सूख गया होता जीवन का नीर अंगारों की बांहें यदि कदम …
नाला —- ६ ************ सप्तपदी की श्वेत जटाओं से रेशा रेशा धागा लिए चल रहा चट्टानों का हथकरघा और धार – धार तानों बानों- से बुनी जा रही पानी की …
पृथ्वी के जन्म पर ************** पृथ्वी का जन्म हुआ तो पहले पहल चुम्बन को दौड़ आया सूरज हवा ने डाल दिये झूले डाल – डाल और इतने इतने गीत रचे …
जानकारी ********* तुम वही कहोगे कि —- पत्थर हैं ये यदि बदले तो — रेत ही तो बनेंगे भुरभुरी ! रेत : खरबूजों की बाड़ियां लगाती धीवरों की अथाह जल …
सतपुड़ा और उसकी बेटी नर्मदा ************************** तुम्हारी ठोस चट्टानें धरती के आदिम अस्तित्व का प्रमाण दे रही हैं पेड़ -पौधे – लताएं घास – फूस कोमल रोएं हैं तुम्हारे और …
जानकारी ********* तुम वही कहोगे कि —- पत्थर हैं ये यदि बदले तो — रेत ही तो बनेंगे भुरभुरी ! रेत : खरबूजों की बाड़ियां लगाती धीवरों की अथाह जल …
