नेलकटर फेंककर ************** छोटा सा नेलकटर एक पूरी संस्कृति है जिसके दायरे में बनते रहते हैं जानवर से आदमी आदमी बनने के चक्कर में हम नाखून काटते रहे और इसी …
पहाड़ों के बीच
पत्थरों से रिसती कविताएं ********************* पृथ्वी में समाते ही ढाल लेंगी शिलाएं उन्हें अपने भीतर हजारों हजार साल बाद हू-ब-हू अक्सों का इतिहास छिपाये मिलेंगे फाॅसिल्स क्या तब भी इसी …
अग्निमुख ********* रजकण से लेकर चट्टान बनने तक की प्रक्रिया में तुमने —- आग को हमेशा -हमेशा अपनी छाती में छुपाये रखा चट्टानों ! कब तक और दोगी सृष्टिक्रम की …
अग्निमुख *** रजकण से लेकर चट्टान बनने तक की प्रक्रिया में तुमने —- आग को हमेशा -हमेशा अपनी छाती में छुपाये रखा चट्टानों ! कब तक और दोगी सृष्टिक्रम की …
पत्थरों के बारे में सोचते हुए ************************ पत्थरों की आंखें इतनी नम क्यों है ? क्यों फूटते हैं सन्नाटों के गीत इनकी आहों से ? दोपहरें इनके शरीर को काला …
पहाड़ो के बीच ************ पहाड़ों की चोटियों तक देह पर अजगर कसे मत दौड़ों किसी गोल पत्थर की तरह लुड़कते चले जाओगे पहाड़ी यात्रा की तैयारी के पहले मोमबत्ती की …
