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पहाड़ों के बीच

पहाड़ से बातचीत *************** पहाड़ ! तुझे पर क्या टूट पड़ा है कि तेरी चट्टानें पहले से ज्यादा भयावह लगने लगी हैं इनके इर्द गिर्द और ऊपर संतरियों —– से …

ठीक पहचान के लिए ****************** पानी जब सदियों से ठण्डा पड़ा हो तो – – – उसे खौलाना जरुरी हो जाता है वह बादल ,बिजली, आकाश से गुजरकर खुद को …

सैलानियों के लिए *************** पहाड़ की शक्ल में सिवान तक आ पहुंचा है तानाशाह उसकी भौंहों पर झुके हैं बादल पलकों पर खेल रही शबनम कलाइयों पर लिपटी है नदियां …

अनुभव ****** तुमने कभी पहाड़ को छेड़कर देखा है वह प्रलय के बादलों जैसा गड़गड़ाता है चट्टानों को झकझोरा है वे शेरनी की तरह गुर्राती है पत्थरों से बोले हो …

सुप्रभात नूतन वर्षाभिनंदन संकल्प —-१ एक लपलपाता खंजर मेरे माथे पर लटका है जहां भी नजरें दौड़ाता हूं वहां अपने उन्नत – अनंत माथे पर झूलते खंजर ही खंजर दिखाई …

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