बेखबरी ******* एक दूसरी से सटी हुई चट्टानें इतनी अपरिचिता क्यों है ? कब जानेंगी ये अपना इतिहास और कब बतायेंगी एक -दूसरे को अपनी वर्तमान कथा ? चुप्पी जो …
पहाड़ों के बीच
पहाड़ ***** दावानल के वक्त एक लम्बी लकीर की तरह सुलगने लगता है पहाड़ मेघों की झरी में झरनों , नदियों -प्रपातों के संगीत में डूब जाता है पहाड़ ! …
मेरा बेटा ******** मेरा बेटा मन ही मन मेरी कीमत आंक रहा है मुझमें उसे मुद्राओं की फसलें दिखाई देती है जबकि तथ्य यह है कि मैं घर,घूरे ,सड़क या …
कटी हुई जमीन ************ तुमने काफी कुछ दूर से ताकती हुई जमीन को दे दिए झरने — नदियां दूर दूर तक फैले मैदानों को पेड़ -पौधे -घास – लताएं असंख्य …
हांका ***** आसमान से पहाड़ों —मैदानों तक सांय —– सांय न तो धूप में कोई हरकत है न पेड़ -पौधों पत्तों में थिरकन हरचरन ! ओ हरचरन !! क्या सो …
लो,जल्दी करवट लो ! ****************** ओ पठारों ! ये छोटे बड़े अनगिनत पत्थर तुम्हारी देह पर चेचक के छालों जैसे छलछलाते रहते हैं सूरज रोज़ -रोज इन पर — धूप …
संबंध ****** तुम–धूप ,हवा ,पानी भी तो बन सकती थी यदि ऊंचाइयां छूना चाहती तो आसमान से भी अपने संबंध जोड़ सकती थी अब समझ में आया कि तुम्हें चट्टान …
हवा के खिलाफ ************* कमरे और बाहर की हवा के चलन कितने बेमेल हो गये हैं चट्टानी छातियों वाली घाटियां कितनी बेसुध है हवा इनके माथों पर पंखें झलती हुई …
