खरा होने के वास्ते (“मँजती धुलती पतीली“) ~~~~~~~~~~~~ जब आपसी संवाद से ज्यादा गप्पों में कटने लगे दिन तो समझ लो — ठहराव का एक पहाड़ खड़ा होने लगा है …
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August 2020
इसके बाद वे सबअपने -अपने तंतर -मंतरअपने -अपने धतकरम मेंमशगूल हो जाते हैं——-और स्वाधीनता इन कारनामों को देखते- सुनतेजाने कब सो जाती फिर से जिसे उठाने के बहानेबीच -बीच में …
