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May 2024

बाहर निकलो *********** जाल चाहे जिस रुप में हो जाल होता जिसमें उलझता ही जाता समूचा शरीर बल्कि अस्तित्व भी बाहर निकलो प्रेमशंकर इतने बाहर कि ठीक से खोज सको …

देना ही चाहते हो तो ***************** पानी से कहा हवा चाहिए ? तो जोर से हंसा और बोला — वह तो मुझमें ही समाहित है फिर पूछा — आग चाहिए …

बेहद उदास है धरती **************** धरती की गोद में जो प्रकाश है प्रकट होकर इतना हरा होता कि दूर दूर तक वनस्पतियों से भर जाते कछार वनस्पतियों की कोंख में …

गूंगेपन की कसमसाहट ******************* अग्नि ने कोई शब्द नहीं रचा न जल ने न वायु ने और पुष्प कभी बोलते नहीं आकाश ने कोई भाषा नहीं रची न नक्षत्रों ने …

राम जाने ******** सर्जना के नाम पर चीजें ही रचीं तुमने मैंने कविताएं राम जाने कब तक रहेंगी पृथ्वी पर चीजें तुम्हारी लेकिन मेरी कविताएं राम के जाने के बाद …

राम जाने ******** सर्जना के नाम पर चीजें ही रचीं तुमने मैंने कविताएं राम जाने कब तक रहेंगी पृथ्वी पर चीजें तुम्हारी लेकिन मेरी कविताएं राम के जाने के बाद …

वक्त ***** यह बगीचे को नहलाने का वक्त है वक्त है — भीगे परिधान में सद्यस्नात लताओं का पंखों में आकाश भरने का वक्त है चिड़ियों का वक्त है तितलियों …

महक ***** दिनों बाद मां मिली तो खिलते रहे देर तक रोम रोम स्वप्न में स्वर्गीय पिता दिखे तो आकाश- सा फ़ैल गया माथे पर आशीर्वाद भाइयों से भेंट हुई …

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