जानकारी ********* तुम वही कहोगे कि —- पत्थर हैं ये यदि बदले तो — रेत ही तो बनेंगे भुरभुरी ! रेत : खरबूजों की बाड़ियां लगाती धीवरों की अथाह जल …
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May 2024
सतपुड़ा और उसकी बेटी नर्मदा ************************** तुम्हारी ठोस चट्टानें धरती के आदिम अस्तित्व का प्रमाण दे रही हैं पेड़ -पौधे – लताएं घास – फूस कोमल रोएं हैं तुम्हारे और …
जानकारी ********* तुम वही कहोगे कि —- पत्थर हैं ये यदि बदले तो — रेत ही तो बनेंगे भुरभुरी ! रेत : खरबूजों की बाड़ियां लगाती धीवरों की अथाह जल …
क्षितिज बनती पहाड़ी से ******************** उठ पहाड़ी दो घड़ी हम बात तो कर लें ! जब कभी भी , दृष्टियां जाती तुम्हारी ओर तब सदा तुम , क्षितिज बनकर रह …
यहां जमीन पर ************ ओ, सदियों से सोई घाटियों ! तुम्हारे ऊपर पत्थरों की स्याह इबारतों में जो लिखा है उसे एकाध बार पढ़ तो लो ! कर लो चाहे …
नर्मदा की शाम ************ नीबी बंध ढीले किये पुष्प गंधी सांसें छोड़ती धारा ,टापू ,वनांगनों और विन्ध्य – सतपुड़ा की संवेदनशील घाटियों के दूरान्तगामी उतार – चढ़ाव तक रतनार नयनों …
नर्मदा की सुबह ************ कुहरे का धुमैला वस्त्र फेंककर नींद से उठी सुबह नहाने चली नर्मदा में धंसकर पानी के छींटों से अलसाये तट हड़बड़ा गये कुनमुनाकर जाग गई ठण्डी …
परेड ग्राउंड पर —५ ****************** (लंबी कविता का अन्तिम अंश ) देश ! जमुहाई नई लगेगा दिल – दिमाग नई लगायेगा हक की आवाज नहीं फेंकेगा पेट नई पकड़ेगा संस्कृति …
