बोलो गम ********* बोल भाई ! बोलो गम अब तो शेष रहे हम तुम ! बोलो भाई बोलो गम चोर बडा़ या नंगा ऊँचा है न किसी से कोई कम …
सतपुड़ा के शिखरों से
पतझर के बाद गुलमोहर ******************** (1) हरी देह पर लाल हँसी है दृष्टि सृष्टि की यहाँ फँसी है कल था जोगी पूर्ण दिगम्बर मस्ती उसमें आज बसी है । (2) …
कुछ वैसा ही *********** लिख लिखकर मैं होता प्रसन्न पढ़कर बतलाता बार बार ! ! सूरज लिखता ज्यों ज्योतिपत्र लिखता चंदा ज्यों धवल प्यार तारे लिखते ज्यों नभ गंगा बादल …
लौट रहे हैं गाँव में **************** बहुत दूर से खलिहानों तक हल्की हल्की लाल लाल सी धूल उड़ रही निश्चय ही चेतुए खेत से संझ्झा के संग लौट रहें हैं …
एक बार फिर ************ इसके घर बरसात हमारा घर सूखा ! इसके घर में नाज हमारा घर भूखा ! कैसा है इंसान कि इस पर लानत है ! इसके तन …
