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पकी फसल के बीच

नाला —- ११ ************ नाले का जनेऊ पहने पहाड़ अंधेरे में नहाने की अनुभूति का स्फुरण लिए जब माथे पर पगडण्डी की चुटइयां बांधें सुनसान रात में फेंफर तले तांत्रिक …

नाला —-५ ********** सुबह – सुबह भाप छोड़ता दोपहर तक माथे पर तटछैंया का फटा गमछा लपेटे किरनों की वंशी में प्रेम चारा लगाये मछलियां पकड़ने का खेल खेलता नाला …

नाला —४ ********* पहाड़ों की कोंख से प्रकट होता उज्जवल कोमल नवजात की तरह किलकारियां भरता लहरों की डोर से — भर भर पैंगे झूल रहा है नाला अकेला मत …

नाला —३ ********* ताजी ताजी कुनकुनी बूंदी- सा चासनी सहित जहां तहां छितर जाता नाला और रिसक कर गोल गोल लड्डू – सा कुण्ड में समा जाता चाहे चूरा हो …

नाला — २ ********* बांस वन के घोंसलों से मानों किसी गोरैया के पके अण्डे से निकलकर चेनुए – सा फुदक रहा नाला जिसे चुगाने दूर तक छिटक रही बाड़े …

सतपुड़ा की पसलियो से रिसता : धनपाड़ा का नाला ( नाला — १ ) पहाड़ों पठारों से होकर सिर पर समा– धान की पुटरिया लादे हाट को निकले आदिवासियों –सा …

इतना ही नहीं सोचा **************** जब देने ही निकले तो गालियां ही दी तुमने ! दुआएं भी तो दे सकते थे जबकि दोनों ही आवाज की बेटियां हैं !! इतना …

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