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पकी फसल के बीच

आलिंगन ********* गुनगुनी धूप ने छुआ तो पिघलता रहा देर तक और वह भी आहिस्ता आहिस्ता हमारी रही मुझमें एक दूजे की गंध में डूबी पसीना पसीना होती रही देह …

कहीं न कहीं *********** सड़कें सड़कों से छेड़छाड़ करती आड़ी तिरछी बलखाती राजमार्गों से जुड़ जातीं कहीं न कहीं पटरियां पटरियों से सन्नाती बोलती – बतियाती थर्राते हुए जंक्शनों से …

एक साथ ********* मैंने लिखनी चाही कविता उसी क्षण गोल में आ बैठी नन्हीं बिटिया कविता लिखने के क्षण वात्सल्य से भरे होते हैं कविता लिखते लिखते बेटी सयानी होगी …

भूख का नाता ************** प्रदूषण के करिश्मे दिखाता जब भी सागर या नदियों को छेड़ता कोई मैं अन्दर तक छटपटा जाता मछली – सा मेरी भूख के लिए समाधान जो …

मखौल उड़ाते लोगों से ******************** पसीने का तुम्हें जितना भी मखौल उड़ाना हो उड़ा दो लेकिन जिस वक्त कविता तुम्हें देखना शुरु करेगी वह तुम्हारी मौत तक शब्दों की लंबी …

बेटी का दूसर खत **************** पत्र के जवाब में बेटी ने ससुराल से लिखा है — तुम मुझे जीवन राग के वास्ते जो बातें लिखते हो वे मेरी समझ में …

बेटी का पहला ख़त ***************** बेटी ने लिखा है — बापू ! आंगन की मुट्ठी भर धूप भेज दो लिखा है थोड़ी – सी पत्तियां ही पड़ा दो बाड़े वाले …

जिनसे ****** जिनसे तंग आकर आत्महत्या तक पहुंची औरत वे भी अपनी पूरी सुरक्षा के बाद बचाने दौड़े उसे और जब भेजी गई लाश पोस्टमार्टम को तो लपककर चीलघर की …

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