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पकी फसल के बीच

कविता होते हैं बच्चे ****************** फूल पत्ती पर लिखना है लिखना है तितली पे कविता नदी झरनों पर लिखना है लिखना है चिड़ियों पे कविता सूरज चांद तारों पर लिखना …

तवा ****** चूल्हे पर चढ़ते ही चमक उठती घर की आंखें तब मेरी तपस्वी देह से उठने लगती सौंधी बयार चित्तियां पड़ी रोटियों की फैल जाती पास पड़ोस मोहल्ले तक …

सांस्कृतिक हमला *************** आप चाहते हैं कि आपके मकान में चारों तरफ से हवा ,प्रकाश आते रहें तो मेहरबानी करके घर के आसपास प्राचीरे मत उठाइये खोले रखिए घर की …

गर्भगृह तक *********** हवा ने पेड़ों के कान में कुछ सुरसुराया और बजने लगे कछार और जोर थिरकने लगी नदी और फिसल चले लहरों के रुमाल हिलाते प्रपात कोसों दूर …

छोटी जगह ********** वैसे लिखने के लिए छोटी जगह ही चाहिए लेकिन बड़ा कठिन होता छोटी जगह में लिखना जहां न तो बालक होते न प्रेरक ,न सलाहकार होते हैं …

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