कविता होते हैं बच्चे ****************** फूल पत्ती पर लिखना है लिखना है तितली पे कविता नदी झरनों पर लिखना है लिखना है चिड़ियों पे कविता सूरज चांद तारों पर लिखना …
पकी फसल के बीच
तवा ****** चूल्हे पर चढ़ते ही चमक उठती घर की आंखें तब मेरी तपस्वी देह से उठने लगती सौंधी बयार चित्तियां पड़ी रोटियों की फैल जाती पास पड़ोस मोहल्ले तक …
अब ये हाल हैं ************* कहां जा रहे हो बाबू ? माफ़ करना मैं कोई उपदेशक नहीं हूं फिर भी तुम्हारी ने देखकर पूछने का मन हो गया है पहले …
पिता की डायरी ************* ( २ ) मां ने किसी को भी नहीं कोसा आज तक इसलिए कि पिता की डायरी में कहीं भी नहीं टोका है किसी को भी …
पिता की डायरी ************* ( १ ) मां ने जतन से रखी है पिता की डायरी चाहे जब एकान्त में फेरती उस पर हाथ ठीक उसी तरह जैसे कि — …
सांस्कृतिक हमला *************** आप चाहते हैं कि आपके मकान में चारों तरफ से हवा ,प्रकाश आते रहें तो मेहरबानी करके घर के आसपास प्राचीरे मत उठाइये खोले रखिए घर की …
गर्भगृह तक *********** हवा ने पेड़ों के कान में कुछ सुरसुराया और बजने लगे कछार और जोर थिरकने लगी नदी और फिसल चले लहरों के रुमाल हिलाते प्रपात कोसों दूर …
छोटी जगह ********** वैसे लिखने के लिए छोटी जगह ही चाहिए लेकिन बड़ा कठिन होता छोटी जगह में लिखना जहां न तो बालक होते न प्रेरक ,न सलाहकार होते हैं …
