तवा ***** चूल्हे पर चढ़ते ही चमक उठती घर भर की आँखें तब मेरी तपस्वी देह से उठने लगती सौंधी बयार चित्तियाँ पडी़ रोटियों की फैल जाती पास पडो़स मुहल्ले …
पकी फसल के बीच
पिता की डायरी ************** माँ ने जतन से रखी है पिता की डायरी चाहे जब एकान्त में फेरती उस पर हाथ ठीक उसी तरह जैसे कि —- आखरी वक्त तक …
