पानी में ******* शीतलता है ज्वाला भी है पानी में संजीवनी है हलाहल भी पानी में गंगा रेवा सागर की भी संस्कृतियाँ है पानी में कमला भी है रंभा भी …
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May 2021
ऐसे में कैसे ********* ऊँट चाहे जिस करवट बैठे रेगिस्तान में अच्छा लगता है जहाँ वह कररवटें बदल -बदल कर रेत के पहाडो़ से खुद को और दूसरों को बचाता …
बोलो गम ********* बोल भाई ! बोलो गम अब तो शेष रहे हम तुम ! बोलो भाई बोलो गम चोर बडा़ या नंगा ऊँचा है न किसी से कोई कम …
बौराया प्यार दो ************** बासंती बेला में बौराया प्यार दो –। चाहे दो पल को ही मौसम का ज्वार दो ।। रोक लो मुझे तनिक अमुवा की छाँव में बुलबुल …
रुँ -रुँ बाजा रुँगताडा ***************** लगे लबारी ढोल पीटने नाच रहे गलियों में नंगे भिन्न -भिन्न फिरकों में बँट कर भड़काते रहते दंगे ऐसे ऐसे काम करे ये ज्यों यमराजों …
रुँ-रुँ बाजा रुँगताडा़ ***************** (21/5/21 के अंश से आगे ) ये सारी सुविधाएँ ओढे़ हमको नहीं नसीब रोटियाँ उन पर ऋतुएँ मेहरबान हैं हमें मिली केवल लँगोटियाँ तिसपर भी वे …
रुँ -रुँ बाजा रुँगताडा़ ****************** रूँ -रुँ बाजा रुँगताडा़ रुँगताडा़ भई रुँगताडा़ टी .व्ही .पर ऐलान हुआ वन में गूँजी हुआ- हुआ चोर उच्चके पायेंगे बिन मेहनत मालपुआ अगली सदी …
पतझर के बाद गुलमोहर ******************** (1) हरी देह पर लाल हँसी है दृष्टि सृष्टि की यहाँ फँसी है कल था जोगी पूर्ण दिगम्बर मस्ती उसमें आज बसी है । (2) …
