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May 2021

पानी में ******* शीतलता है ज्वाला भी है पानी में संजीवनी है हलाहल भी पानी में गंगा रेवा सागर की भी संस्कृतियाँ है पानी में कमला भी है रंभा भी …

ऐसे में कैसे ********* ऊँट चाहे जिस करवट बैठे रेगिस्तान में अच्छा लगता है जहाँ वह कररवटें बदल -बदल कर रेत के पहाडो़ से खुद को और दूसरों को बचाता …

रुँ -रुँ बाजा रुँगताडा ***************** लगे लबारी ढोल पीटने नाच रहे गलियों में नंगे भिन्न -भिन्न फिरकों में बँट कर भड़काते रहते दंगे ऐसे ऐसे काम करे ये ज्यों यमराजों …

रुँ-रुँ बाजा रुँगताडा़ ***************** (21/5/21 के अंश से आगे ) ये सारी सुविधाएँ ओढे़ हमको नहीं नसीब रोटियाँ उन पर ऋतुएँ मेहरबान हैं हमें मिली केवल लँगोटियाँ तिसपर भी वे …

रुँ -रुँ बाजा रुँगताडा़ ****************** रूँ -रुँ बाजा रुँगताडा़ रुँगताडा़ भई रुँगताडा़ टी .व्ही .पर ऐलान हुआ वन में गूँजी हुआ- हुआ चोर उच्चके पायेंगे बिन मेहनत मालपुआ अगली सदी …

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