घर -घर तुम बिखराओ फूल ********************** हर समय खिले-से रहते जो पथ पर वे बिखराते फूल पल पल में रोते रहते जो पथ पर वे बरसाते शूल नहीं कहीं कड़वाहट …
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May 2021
हमें ही परचानी होगी आग ********************** लोग हैं कि कानून बना मिटा रहे लोग हैं कि रेलों -बसों-यानों में आ -जा रहे लोग हैं कि कोठियों सहित नम्बर दो हुए …
गीतों के ******** गीतों के हरे भरे नंदन में जाने ये क्या हुआ ? कोसों तक उठती थी टेसू की सुर्ख हँसी कोसों तक महुए की मनुहारें सुनते थे कोसों …
मुक्तक ****** जो सहज ही चल पडे़ वह रीत है । जो अधर पर मौन है वह प्रीत है ।। चपल बालक- सा उठे जो चौंककर — समझ लो बस …
लौट रहे हैं गाँव में **************** बहुत दूर से खलिहानों तक हल्की हल्की लाल लाल सी धूल उड़ रही निश्चय ही चेतुए खेत से संझ्झा के संग लौट रहें हैं …
एक बार फिर ************ इसके घर बरसात हमारा घर सूखा ! इसके घर में नाज हमारा घर भूखा ! कैसा है इंसान कि इस पर लानत है ! इसके तन …
डूबकर डूबा नहीं हरसूद गाँव के गाँव जाने कितनी -कितनी बार उजाडे़ जाते रहे राज -लिप्सा में मनाये जाते रहे तानाशाहों द्वारा हत्या के जश्न बार -बार यह भी हुआ …
डूबकर डूबा नहीं हरसूद गाँव के गाँव जाने कितनी -कितनी बार उजाडे़ जाते रहे राज -लिप्सा में मनाये जाते रहे तानाशाहों द्वारा हत्या के जश्न बार -बार यह भी हुआ …
