प्रणय का अनहद *************** लिख देना चाहता एक कविता अपनी कलम से बदन पर तुम्हारे उतार देना चाहता मन में सभी इन्द्रधनुष अपने और भर देना चाहता प्रणय का अनहद …
प्रणय का अनहद
भूल जाने की याद में ******************* जब से भूलने का कहा तुम्हें भूलने की कोशिश में लगा रहता सपनों से भी कहता कि वे भूल जाने को आया करें भूल …
जिनसे भी करता प्यार ******************* जिनसे भी करता प्यार याद नही रहती जन्मतिथि याद ही नहीं रहती रुचि -अरुचि अच्छाई -बुराई उनकी जिनसे भी करता प्यार नहीं खिंचा पाता फोटुएँ …
हँसने के लिए ************ हँसने के लिए ढेर सारी चीजें नही चाहिए कुछ बेफिक्री ,कुछ उमंग कुछ आनंद और छाती भर आक्सीजन काफी है आक्सीजन ः जो हरे भरे पेडों …
कायाकल्प —————- मिलते रहे प्रथम मिलन की तरह हर बार फूटते रहे रोम -रोम से छंद हर बार हर बार होता रहा कायाकल्प हमारा !! (श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के …
