Home आज की कविताभूल जाने की याद में

भूल जाने की याद में

by Dr. Vinita Raghuvanshi
भूल जाने की याद में
*******************
जब से भूलने का कहा
तुम्हें भूलने की कोशिश में लगा रहता
सपनों से भी कहता कि वे
भूल जाने को आया करें
भूल जाने की याद में जागता मन
यही यही करता उस पेड़ की तरह
जो बारिश में बार -बार मुँह पोंछता
बार -बार भींगता रहता है ।
(श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह “ प्रणय का अनहद ” से उद्धृत )

You may also like

Leave a Comment

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More