हमारा चाहने वाला **************** हमारा चाहने वाला जरुरत से ज्यादा अपेक्षाएं करने लगता है हमसे तो वह हमारे लिए स्वादिष्ट भोजन की तरह होकर भी उदरशूल उठाता वायुविकारी हो जाता …
देखा बिना नाम के तुम्हे
गालियाँ जब भी ************** गालियाँ जब भी भूगोल की सरहदें पार करतीं पहले पहल इतिहास ही घायल होता हर बार झुलसता उसका ही चेहरा । राजनीति के फरेब रचती गालियाँ …
बहती रही नदियाँ **************** देखते रहे नीची नजरों से शिखर घूरती रहीं निकृष्ट निगाहों से घाटियाँ किन्तु इनकी परवाह किये बगैर पहाड़ की नसों से होकर बहती रही नदियाँ । …
