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February 2025

मोड़सींग ******* ( ३ ) लंबी कविता का अंतिम अंश ************************ जब कि सारी बस्ती गृहस्थिन की तरह पहनती बदलती रही चूड़ियां बिछुए भर्ती – भराती रही मांग गूंजती रही …

मोड़सींग ******* ( ३ ) लंबी कविता का अंतिम अंश ************************ जब कि सारी बस्ती गृहस्थिन की तरह पहनती बदलती रही चूड़ियां बिछुए भर्ती – भराती रही मांग गूंजती रही …

मोड़सींग ********** ( २ ) सिर से पांवों तक झाड़ुओं की सीटें खोंसे तुम जहां – जहां जाते वहां – वहां लहरा उठती एक रंगीन झील जिसमें तैरते थिरकते बच्चे …

मोड़सींग ******* ( १) लंबी कविता का प्रथम अंश *********************** किसी ने कोई भी शब्द नहीं सिखाया था तुम्हें मोड़सींग हर बार चाहा था तुमने पढ़ना तो तुम अ आ …

बाज नहीं आयेगा वह ******************** ( ३ ) (लंबी कविता का अंतिम अंश ) अश्वत्थामा के जिस्म – रुह पर यदि औरत के रुप – रंग का नशा चढ़ा होता …

बाज नहीं आयेगा वह ***************** ( २ ) दुर्योधन तो पराजयी परवशता से पागल हो जीवन के अन्तिम प्रतिशोधी क्षण में नारियल की तरह भट्टाभट्ट फोड़ना चाहता था पांडवों के …

बाज नहीं आयेगा वह ***************** ( १ ) (लम्बी कविता का अंश ) तुमने, “अश्वत्थामा नरों वा कुंजरों वा “ कहला कर युधिष्ठिर के सत्य पर जो स्याही पुतवाई उसने …

छोड़ दिए जाते बेगुनाह ******************* ( ४ ) (कविता का अंतिम अंश ) अंतरिक्ष की ऊंचाइयों से बर्फ की पवित्र चादर ओढ़े एक विराट नीलम की दमक से भी अधिक …

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