Home Archives
Monthly Archives

February 2025

छोड़ दिये जाते बेगुनाह ******************* ( ३ ) अंश दो से आगे ************** मैं जहां भी जाता वहां गूंगे,अंधे,बहरे बंदरों की भीड़ में हो जाता बन्दी मेरी आवाज़ मेरी दृष्टि …

रोटियों के शिल्प ************* रोटियों के शिल्प को लेकर कोई ज्यादा तरक्की न हो सकी आज तक अब भी गोलमगोल है रोटियां जो तोड़कर टुकड़ा -टुकड़ा खायी या खिलाई जाती …

छोड़ दिए जाते बेगुनाह ******************* ( २ ) अंश एक से आगे ******************* आसपास से उमड़ती उच्छृंखल भीड़ों के उपद्रवी चेहरे घेराव,आगजनी, और बलात्कार की स्याह मंजिलें पार कर ले …

छोड़ दिये जाते बेगुनाह ********* ********* ( १ ) बापू ! तुम चले गये यह कोई अनोखी बात नहीं एक दिन सभी को छोड़ना ही पड़ता है शरीर एक दिन …

गांव का ग्रीष्म *************** ( ३ ) शाम ******** काम से लौटा श्रमिक धो हाथ – मुंह कुछ गुनगुनाये और अपने दुधमुंहे को गोद ले कर प्यार से चूमे ,उछाले …

गांव का ग्रीष्म **************** ( २ ) दोपहर ********* चार पल विश्राम को जैसे कि कोई गांव की अमराई में बैठे सुलगायें चिलम फिर धुएं के श्वेत बादल छोड़ता कुछ …

गांव का ग्रीष्म ************* ( १ ) सुबह ********** कि जैसे — पकी फसलें काटती हो चेतुआइन और उसका एक चंचल छोकरा अंकवार भर – भर खेत,खलिहानों, वनों में सोनई …

बत्तियां बुझाकर विन्नू लगा लेती सांकले ********************************* आवाजें सुनते ही दौड़ता था मृगछौने – सा कुलांचे मारता आंगन – ओटले फांदता दोस्तों के बीच सोशल बाबा तक जहां दिन – …

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More