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February 2025

भास्वरता ********* मेरे पास शब्दों का अक्षय कोष है तुम्हें कौन सा शब्द दे दूं मेरी आंखों में कितने ही दृश्य – अदृश्य हैं तुम्हें कौन- सी छवि अर्पित कर …

दूध और खून मिलाकर गट्ट – गट्ट पीने वाले लोग ************************************** दिलो – दिमाग से चिपके मजहब को लगती गोलियां और वे हिन्दी हिन्दी हो जाते पहले फिर भगवान को …

तुम पूरी पृथ्वी हो कविता ********************** तुम ! पूरी पृथ्वी हो कविता भीतर से धधकती ऊपर से ठोस ऊर्वरा जब कुछ भी नहीं रहेगा तब भी एक हरियाली रहेगी कहीं …

लियोनोव के प्रति ************** उन्नीस सौ पैंसठ अट्ठारह मार्च का मध्यान्ह विश्व का एक रोमांचकारी अध्याय हो गया लियोनोव और तू इस इतिहास में स्टील का एक पृष्ठ जैसा जुड़ …

आपातकाल : लोग ,नागिन,दूध और लट्ठ ********************************** कल तक लोग जिस कलश को सिर पर धरे मंगलगीत गाते फिर रहे थे आज वे सड़क के बीचोंबीच बैठी नागिन को देखते …

कीड़े जो पड़े हैं आग में ******************* (२ ) साईं सांझ से या कभी – कभी दिन डूबे के पहले जब भी बोलती थी बाक् सियारी दादी मां ऐसी ही …

कीड़े जो पडे हैं आग में ********************* ( १ ) सई संझ्झा से जब भी बोष्ठिती थी बाघक्सियारी दादी को घेरकर बैठ जाता था परिवार और वे सुनाती जाती कितने …

बरसात में हर बार **************** यूं हर बार गिरता है बरसात में पानी हर बार सबसे पहले छतों – मुंडेरों गच्चियों और पेड़ों – पहाड़ों की छुगनियों को छक कर …

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