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January 2025

चमन तो करना ही होगा कविता *************************** पराग की उत्ताल तरंगों में इन्द्रधनुष रचना कोई वैसी बात नहीं किन्तु सम्मोहन का भी एक समय होता है सिर्फ तितली बनी मत …

हत्यारी आंधी के बाद ****************** दूध दुहते वक्त अचानक गाय के नीचे दब गई धनिया पंख भर छितरे हैं जाने कहां गई चिड़िया ! कुचले – पिछले बदन जहां – …

चुप क्यों हो कविता ***************** बहुत दिनों बाद आई क्या सैर सपाटे पर हो आजकल ! कोई आदमी – वादमी भी मिला या यूं ही घूम रही हो ? बोलो …

बोलो तैयार हो कविता ******************* तुम आई तो मैंने खिड़कियां तक खोल दी रोम – रोम से छलक पड़ा उत्साह जगमगा उठा घर ऐसे में दबे पांव काली बिल्ली की …

अन्तर की ऊर्जा ************* उस वक्त मोम का पिघल कर मोम में ही मिल जाने जैसा कुछ होने लगता है मेरे भीतर संयम को काफी पीछे छोड़ कितनी – कितनी …

वे शब्द ही हैं ************* वे शब्द ही हैं जो जन्मते संगसाथ ध्वनियों की कोख से वे शब्द ही हैं जो खेलते नंग – धड़ंग बच्चों से अर्थों के समाज …

हूजूर और मैं ************ आपका जवाब नहीं सरकार क्या कमाल की तकरीर करते हैं आप ! पिछले वाले हूजूर तो गों-गों करते थे आप गजब के दरियादिल हैं अन्नदाता पिछले …

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