हूजूर और तुम ************ तुम्हारा और हूजूर का क्या मुकाबला तुम्हारी यह औकात कि हूजूर को काले झण्डे दिखाओ जब कि हूजूर को बालों के अलावा कहीं भी काला रंग …
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January 2025
हुजूर और वे *********** हुजूर जा कर सो गये अंतपुर में और वे लोग कर रहे अनशन हुजूर की कोठी के सामने हुजूर का सोना और उनका अनशन पर होना …
हुजूर और हम ************* क्यों यह क्या हो रहा क्यों पहनाई जा रहीं घूंघरमाल बूढ़े बैलों को क्यों घूम रहीं शौकिन बूढ़िएं चटाई के लहंगे पहने ? ऐसा तभी होता …
जाल्पाघाटी का अकेला पेड़ ********************** उजाड़ पहाड़ी की छाती पर खड़ा अकेला पेड़ कभी इससे कभी उससे और हमेशा – हमेशा गुरुत्वाकर्षण से संघर्षरत सब के सब बिछा कर सुला …
रक्तबीज हूं ********** इतिहास की जमीन पर जब भी लगाये जाते फूलों के बगीचे मैं विषमता का विष घोलने चल पड़ता हवा में देखते – देखते लोग एक दूसरे पर …
कस्बे की सेहत ************* ( अंश – १ ) व्यक्तिगत लड़ाई दो गांवों की और हो गया तबाह पूरा कस्बा कस्बा तो क्या वर्ग -वर्ण -सम्प्रदाय – जातियां बदल गये …
कस्बे की सेहत के अंश से आगे ) (अंश -२ ) सुबह होते ही फैली खबर कि काले खां फकीर नहीं रहे बच्चों को चिरौंजी बांटते नहीं लगेगी अब उनकी …
पहरे का संतरी :तीन कविताएं ************************* ( ३ ) पाली की अदला – बदली में बदलते हैं लोग लेकिन पहरे का संतरी नहीं बदला आज तक समय – संतरी घड़ी …
