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January 2025

पहरे का संतरी : तीन कविताएं ************************* ( २ ) सोचता पहरे का संतरी कि घड़ियों में देखा जाकर भी नहीं दिखता समय जो कि सुइयों की नोकों में चुभे …

पहरे का संतरी : तीन कविताएं ************************* ( १ ) पहरे का संतरी लगाता ठोंका पाली की अदला – बदली को जबकि फिसलती सुइयां टिक टिक हरकत भर है घड़ियों …

जरुरत से ज्यादा शिकायत है अपने आप से ************************************* मुझे जरुरत से ज्यादा बहुत बहुत शिकायत है अपने आप से इसीलिए इनसे ,उनसे और तुमसे लड़ पड़ता हूं इतना जितना …

चौदह चित्र : कविताएं ******************* बसंत :१४ और तुम मेरी हंसी से बसंत का शब्दकोश बनाना चाहती हो लेकिन पतझर के मेरे इन घावों पर कोई मलहम पट्टी करता रहता …

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