परेड ग्राउण्ड पर —१ ************* देश ! सावधान! कुछ भी हरकत नई ( नहीं ) करेगा कुछ भी सोचेगा समझेगा नई भाई चारे की नई दिखायेगा शान ! देश ! …
पकी फसल के बीच
भरी पूरी सृष्टि ************ मुझसेे अकेले मिलतेे वक्त भी अकेले नहीं होते एक पूरे परिवेश के साथ मिलते हो तुम बातें करते तो लगता — कि झर रहें हों पुष्प …
इन दिनों ******** कविता लिखना बहुत ही कठिन हो गया है इन दिनों इन दिनों कविता में जीना तो और भी कठिन है जब छीने जा रहे हों शब्दों के …
मित्र ! ****** मित्र ! देना ही चाहते हो तो प्यार दो और इतना दो कि दूसरी कोई गुंजाइश ही न रहे मित्र ! लेना ही चाहते हो तो प्यार …
बेटी की याद *********** खिड़की या दरवाजे से बारिश का नजारा देखते जब कभी चेहरे तक आ जाती बौछारें मुझे तेजी से बेटी की याद आने लगती जो अमरावती के …
हर जगह अब भी *************** गाँव में परिवार से जाना जाता कस्बे में तहसील से शहर में परगने से इलाकों में प्रदेश से परदेश में भारत से जाना जाता द्वीपों …
हर जगह अब भी *************** गाँव में परिवार से जाना जाता कस्बे में तहसील से शहर में परगने से इलाकों में प्रदेश से परदेश में भारत से जाना जाता द्वीपों …
भरी पूरी सृष्टि *********** मुझसे अकेले मिलते वक्त भी अकेले नहीं होते एक पूरे परिवेश के साथ मिलते हो तुम बातें करते तो लगता — कि झर रहे हों पुष्प …
