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सतपुड़ा की पसलियो से रिसता : धनपाड़ा का नाला
( नाला — १ )
पहाड़ों पठारों से होकर
सिर पर समा– धान की पुटरिया लादे
हाट को निकले आदिवासियों –सा
चिरोरी करता
छिन छैंया छिन धूप होता
रेले रेलियों संग टीकू टीकू खेलता
सतपुड़ा की पसलियों से रिस रिस कर बहकर —
धनपाड़े का नाला
धारोष्ण दूध की झाग – सा उठाता
हरेक की अगुवानी को
टनटनाट है आंठों पहर ।
( श्री प्रेमशंकर रघुवंशी जी के कविता संग्रह की पांडुलिपि —- “ पकी फसल के बीच ” से उद्धृत )
पहाड़ी नाला भी स्वागतातुर सा लगे यह बहुत महत्वपूर्ण बात है ।हर अंचल में नदी , नालों की धारा ही एक बड़ी नदी के प्रवाह का जल स्रोत होती है । सतपुड़ा के जंगलों में भी बहुत से नाले जनमते हैं और बरसात के बाद उनका बहाव ,उनकी धार रुक जाती है । सतपुड़ा अंचल में धनपाड़ा गांव का यह नाला हमेशा प्रवाह मय रहता है और पूरे अंचल की प्यास बुझाता है ।यह केवल नाला ही नहीं है वरन अंचल की जरुरतों का समा- धान भी है ।अंचल की फसलों का ,धान का , खेती किसानी और कंद – मूल फल को उपज में बदल देने का जरिया भी है ।यह पहाड़ों पठारों से होकर बहता है ।हाट को निकले आदिवासियों – सा फसल की उपज को लेने का आग्रह करता सा प्रतीत होता है ।चिरोंजी भी बुन्देलखण्ड का देने शब्द है जिसका अर्थ है आग्रह,मनुहार, निवेदन, अरज ।छिन छैंया याने थोड़ी देर में छांव और थोड़ी देर में धूप की तपन महसूस कराता यह नाला आदिवासी अंचल की जीवन धारा है ।इस नाले की छोटी – छोटी धारे हैं जो पानी के रेले जैसी लगती है और कोई – कोई धार पानी का बड़ा रेला लगता है ।ये नाले के प्रवाह का छिपा – छिव्वल का खेल है कहीं ये नज़र आता है और कहीं ये मोड़ में बंद खाकर छुप जाता है ।इस तरह ऐसा लगता है मानो यह छुपा- छुपाई खेल रहा है । सतपुड़ा की पसलियों से दिखता यह नाला कहीं कहीं फेनिल हो जाता है और लगता है यह जलधारा नहीं बल्कि दूध की झाग है । धारोष्ण दूध की धार का फेनिल झाग । सतपुड़ा में बहकर यह हर आगंतुक के स्वागत को तैयार हर समय स्फूर्तिवान बना तत्पर है । टनटनाट यह भी बुन्देलखण्ड की भाषा का देशज शब्द है ।छिन याने क्षण में छांव और क्षण में धूप की तपन सा । नाले का स्वरुप गढ़ती कविता नाले को सुन्दर और आकर्षक बना देती है ।सतपुड़ा पहाड़ से निकला नाला पठारों तक बह निकलता है और पूरी वादी को हरियाली से आच्छादित कर देता है । धनपाड़े के नाले के घुमाव आकर्षक और अंचल के सौन्दर्य को दुगना कर देते हैं ।
विनीता रघुवंशी
