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पहाड़ों के बीच

ऊर्जा का संघर्ष –२ **************** ओ मेरी प्रार्थना ! तुम मुझे एक स्वर के रुप में मिली और मैंने तुम्हें आचमन की तरह अपने कण्ठ की बंशी में विह्वलता के …

ऊर्जा का संघर्ष –१ ************* ओ मेरी प्रार्थना ! यह मैं नहीं जानता कि हममें से पहले किसने किसे पाया मैं एक यायावर अपने ही — अन्तर की कस्तूरी गंध …

प्रति प्रश्न ******** ये तमाम घोंसले अब सुगबुगाते तक नहीं इन बस्तियों की उदासी बहुत बहुत गहरा गई है घर घर की खिड़की दरवाजे बन्द हैं कुण्डली मारे बैठा है …

राजमहल की खरीद के साथ *********************** लंबी कविता का अन्तिम अंश —–४ ****************************** गढ़ के पत्थरों सुना है — अब तुमसे बारुद बनाई जायेगी यह झूठ भी हो तो — …

राजमहल की खरीद के साथ ************************ लंबी कविता का अंश —–३ *********************** अब भी गा रहे हैं वे — ” गर फिरदोस बररुए जमीनस्त हमीनस्तो— हमीनस्तो ——-हमीनस्तो “ इनके लिए …

राजमहल की खरीद के साथ ************************ लंबी कविता का —-अंश —-३ ************************* बेनजीर बाग की ऐशगाहों में बची शिनाख्तें अब भी जब तब कुछ बोल देती है कि — उसके …

राजमहल की खरीद के साथ *********************** लंबी कविता का —अंश —-२ ******************** तलघर का रास्ता जो भ्रम से नजरबाग तक जल -प्रपात की फुहारों में हमेशा इन्द्रधनुष रचता था फिर …

राजमहल की खरीद के साथ *********************** लंबी कविता का— अंश –१ घुमावदार घाटी की छाती पर खड़े राजमहल के सुनसान दरबारे खास और रनिवास से रात बिरात घोर अन्धकार में …

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