अब ***** बायां हाथ चला और किनारे खड़े पेड़ के पृष्ठ प्रक्षालन में जुट गया नदी ने अपने भीतर पेड़ की छाया में एक प्रतिबिम्ब और जोड़ लिया फिर दाहिना …
पहाड़ों के बीच
इससे पहले ********** जो लिए हैं तुमने वे तुम्हारे निजी संकल्प है यह तुम सोचते हो वे अपने पांव चलकर हमारे घर आ गये हैं हम घर आये मेहमान का …
पहाड़ ****** दावानल के वक्त एक लम्बी लकीर की तरह सुलगने लगता है पहाड़ मेघों की झरी में झरनों ,नदियों -प्रपातों के संगीत में जुट जाता है पहाड़ ! सर्दी …
बागी ***** वे हत्याएं करके पहुंच जाते हैं बीहड़ों में पहाड़ उन्हें अपनी गोद में बिठाने से इंकार नहीं करता पिता की तरह मुआफ करता है उन्हे और मिटाता है …
गोष्ठियों और गालियों से परे ********************** विजय के विदिशा लौटने के बाद पत्थरों पर जिस इन्द्र धनुष को टूट कर बिखरते देखा था हमने आज भी तुम्हारी आंखों के सामने …
मेघ विवेकानंद हैं *************** तिथि ,दिन या मूहूर्त की घोषणा किये बगैर बिना किसी यक्ष संदेश के इधर आओ अपनी कौंधों के साथ डायनामाइट की दन्नाहट लिए ताकि शयनागारों में …
हर शब्द ****** हर शब्द एक मुस्लिम सफर है स्याह और ठोस चट्टानों से ध्रुवान्तों की बर्फीली चोटियों तक ! हर शब्द एक लक्ष्य भेदी बाण है कमान से छूटा …
जिन्दगी ******** जिन्दगी जैसी कोई चीज मेरे पास आई बोली –मुझे छुओ अपना क्या अपना तो छूने का लम्बा इतिहास है पत्थर को छुएं तो लहरीली नदिया हो जाये उससे …
